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Poetry

Maa…

ओस की बूँद को समेटती बेले के पत्ते सी माँ मलयज के झोकों सी माँ' मरुभूमि में शीतलता सी माँ, हरियाली सी माँ जिसे देख श्रम क्लांत पथिक जीवन का अमृत पा जाएँ उस पर्वत सी अडिग निडर माँ सावित्री सी माँ जिसे देख दुखों का यम भी स्वयं ठहर न…

कोरोना से

प्रभु की महिमा है अपरंपार, बचे हैं चारों धाम, काशी और हरिद्वार। सोंचा है कभी कैसे, बचे हैं मथुरा औ' वृंदावन, क्योंकि, इसके रज रज मे बसे हैं, राधा मोहन। बालाजी, रामेश्वरम तक का, बचा है कोना कोना, फिर क्या है मुश्किल, काहे का रोना।…

By the Window

I yearn for Simplicity I yearn for Certainty Where there is calm and peace And a flavor of tranquility I yearn for all what I abhorred While abhorring all what I wished If eyes are the gateway to the soul Mine is lost…

हमारी माँ – धरती

सृष्टि का जबसे जन्म हुआ तुम से मेरा सम्बन्ध हुआ मैं तुम सबको जीवन देती फल फूलों से झोली भर्ती मुझ पर ही केवल जल मिलता जिससे जीवन चलता रहता सुन्दर झरने , बहती नदियां और ताल तल्लैया भरे हुए…